share on facebook

Saturday, November 14, 2015

asthma दमा - की होम्यो चिकित्सा

सभी रोगी जो दमे से पीड़ित है वो और उनके परिचित जानते है की इस बीमारी से वो कितने असक्त हो जाते है ,उन सभी भाई बहनों ,बुजुर्गो की जानकारी के लिए ये पोस्ट लिखी गई है
जैसा मै हर पोस्ट में कहता हु की प्यार और जानकारी बटाने से दुगने हो जाते है ,आप भी किसी के साथ प्यार बाटिये ,पोस्ट शेयर कीजिये ,और इसे ज्यादा से जायदा लोगो तक पहुचाये ,ताकि आप भी अपने दिल में ख़ुशी महसूस करे ,अगर इस पोस्ट से एक भी व्यक्ति को सही होने की प्रेरणा मिली तो मै खुद को भाग्यशाली समझुगा ..

किसी भी व्यक्ति के गले में जो सांस की नली होती है उसे ट्रैकिया (ट्रेचेय) कहा जाता है। ये नली दो भागों में बंट जाती है जिन्हे ब्रौंकाई कहते है। इन दोनों नलियों में से एक नली तो दाएं फेफड़े में चली जाती है और दूसरी बाएं फेफड़े में चली जाती है। जब इन दोनों नलियों में बलगम जमा हो जाता है जो निकालने से भी नहीं निकलता या बहुत ही मुश्किल से निकलता है। तब इसको दमा रोग कहा जाता है।
लक्षण-
दमा रोग में रोगी को सांस बड़ी मुश्किल से आती है। रोगी सीधा बैठ जाता है तथा सिर को पीछे की तरफ करके दोनों हाथों को भी पीछे की ओर फैला देता है ताकि उसे सही तरह से सांस आ सके। रोगी की सांस की नलियों और फेफड़ों में बलगम भरा होने के कारण उसके फेफड़ों में से सांय-सांय की सी आवाज आती रहती है। रोगी की पूरी छाती में सीटियां सी बजती रहती है। रोगी का माथा ठण्डा पड़ जाता है और चेहरा पीला हो जाता है। दमे रोग के यह लक्षण अक्सर रात को ही उभरा करते हैं
दमा रोग में विभिन्न औषधियों का प्रयोग-
1. एलूमेन- अगर अचानक दमे का दौरा पड़ता है तो उस समय लगभग आधा ग्राम फिटकरी के चूर्ण को मुंह मे रखने से आराम मिलता है।
2. नैट्रम-सल्फ- रोगी को बरसात या नमीदार मौसम आते ही दमे का रोग तेज हो जाना या बच्चे को दमा रोग हो जाना जो सुबह के 4-5 बजे तेज हो जाता है आदि में नैट्रम-सल्फ औषधि की 6x या 12x की मात्रा देने से लाभ मिलता है।
3. लैकेसिस- रोगी जैसे ही रात को सो जाता है, उसके थोड़ी देर के बाद दमे का दौरा पड़ने के कारण रोगी को उठना पड़ता है। रोगी अपने गले या छाती पर किसी भी तरह का दबाव सहन नहीं कर पाता है और रोगी कपड़े आदि का स्पर्श भी सह नहीं सकता। इस तरह दमे के दौरे के उठने पर रोगी के जाग जाने के बाद खांसते-खांसते आखिरी में बहुत सारा पतला सा बलगम निकल जाता है और रोगी को आराम पड़ जाता है। इस तरह के दमे के रोग वाले लक्षणों में रोगी को लैकेसिस औषधि की 8 या 200 शक्ति देने से लाभ मिलता है।
4. कार्बो-वेज- कार्बो-वेज औषधि को खासतौर पर बूढ़े व्यक्तियों के दमे में प्रयोग किया जाता है। बुढ़ापे में व्यक्ति का बहुत ज्यादा कमजोर हो जाना, दमे का दौरा पड़ने के कारण रोगी को ऐसा महसूस होता है जैसे कि उसके अभी प्राण निकलने वाले है। रोगी सांस लेने के लिए बहुत ज्यादा बेचैन हो उठता है। जब रोगी को डकार आती है तब जाकर उन्हें आराम मिलता है। इस औषधि की 30 शक्ति दमे के उस दौरे में भी लाभकारी है जो पेट में गैस भर जाने के कारण पैदा होता है।
5. कैलि-कार्ब- अगर रोगी को दमे के रोग का दौरा सुबह के 3 बजे बहुत तेज होता है तो रोगी को कैलि-कार्ब औषधि की 30 शक्ति या 3x मात्रा बहुत ही लाभ करती है।
6. एकोनाइट तथा इपिकाक- दमा रोग की शुरुआती अवस्था में रोग को कम करने के लिए ऐकोनाइट औषधि की 2x मात्रा रोगी को देने के लगभग आधे घंटे के बाद इपिकाक औषधि की 2x मात्रा देनी चाहिए। इन दोनों औषधियों को एक के बाद एक सेवन करने से रोगी की सांस और कफ पर काबू पाया जा सकता है।
7. ब्लैटा ओरियेन्टेलिस- रोगी को जिस समय भी दमे का दौरा उठे उसे उसी समय ब्लैटा ओरियेन्टेलिस के रस की 25-25 बूंदे गर्म पानी में देने से या 3x मात्रा देने से दौरा रुक जाता है।
8. कैलि-बाईक्रोम- दमे का दौरा जब आधी रात के 3-4 बजे उठता है, रोगी को सांस नहीं आती और सांस लेने के लिए उसे उठना पड़ता है। रोगी के गले से तार की तरह का लंबा-लंबा बलगम निकलता है तब जाकर रोगी को आराम मिलता है। इस प्रकार के लक्षणों में रोगी को कैलि-बाइक्रोम औषधि की 30 मात्रा या 3x मात्रा देना लाभकारी रहता है।
9. सल्फर- अगर रोगी को अपनी छाती भारी सी महसूस होती है, सांस लेने में परेशानी होती है, बलगम गले में चिपक जाता है जिसे निकालने के लिए रोगी को काफी मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे लक्षणों में अगर रोगी को सल्फर औषधि की 1 मात्रा दी जाए तो रोगी को बहुत आराम मिलता है।
10. इपिकाक- दमे के रोगी को अपनी छाती में सिकुड़न-सी महसूस होती हो, रोगी के खांसने पर छाती में बलगम की घड़घड़ सी आवाज आती रहती हैं लेकिन जितनी घड़घड़ाहट छाती से सुनाई देती है उससे ज्यादा बलगम निकलता है, उनका रोग जरा-सा भी हिलने-जुलने से बढ़ जाता है। ऐसे लक्षणों में रोगी को इपिकाक औषधि की 3 शक्ति देना लाभकारी रहता है।
11. ब्रोमियम- समुद्र के किनारे रहने वाले व्यक्तियों को होने वाला दमा रोग जो समुद्र में तो ठीक रहता है लेकिन समुद्र के किनारे पर आते ही दमे का दौरा उठ जाता है। ऐसे रोगियों को ब्रोमियम औषधि की 2-3 शक्ति देने से लाभ मिलता है।
12. मैडोराइनम- दमे के ऐसे रोगी जिनका रोग समुद्र के किनारे पर आकर कम हो जाता है। ऐसे रोगियों को मैडोराइनम औषधि की 200 शक्ति देना अच्छा रहता है। इसके अलावा दमे का रोगी अगर पेट, छाती या घुटनों के बल लेटे तो उसे मैडोराइनम औषधि देनी चाहिए।
13. जानकारी- अगर दमे के रोग में रोगी को दूसरी औषधियों से लाभ नहीं होता तो रोगी को मैडोराइनम या ट्युर्क्क्युलीनम (बैसीलीनम) को दूसरी औषधियों के बीच में सेवन कराना चाहिए।
.
.
नोट -होमियोपैथी लक्षणों का बिज्ञान का है लक्षण मिलने पर ही दवा फ़ायदा करती है इसलिए अपने निकटतम स्थानीय पंजीकृत होमियोपैथी चिकित्सक से से सलाह लेकर ही औषधि का सेवन करें
किर्पया किसी भी शंका के निवारण के लिए आप मेसेज करे क्योकि सभी शेयर की गई पोस्ट पर जा कर सवालो का जवाब देना संभव नहीं हो पता है